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वक़्त की सच्चाई

कुछ भी एक जैसा नहीं रहता। फिर वो चाहे वक्त हो, हालात हो या इंसान..

ख़ामोशी की समझदारी

नादानियाँ चुप होने नहीं देती, समझदारी अब कुछ बोलने नहीं देती!

यादों का बोझ

इंसान वही याद करता है, जिसे वो भूलना चाहता है, क्योंकि कुछ यादें जाने से पहले इजाज़त नहीं लेतीं। 💔

सफेदी

ये जो सफेदी है ना पहाड़ों की, बिल्कुल वैसी ही है मेरे इश्क़ की नियत…

दर्द जो माफ़ नहीं करता

कुछ घाव माफी की इजाज़त नहीं देते…!

खामोश जीत

वो मुझे हराने में लगे हैं… जिनसे मैं जीतना ही नहीं चाहता.